September 29, 2018

सड़क के रास्ते आया विकास, एक सड़क ने बदली मदनवाड़ा की जिंदगी

शहीद एसपी श्री विनोद चौबे तथा पुलिस जवानों के शहादत की भूमि है मदनवाड़ा। गाँव के सुमेर सिंह बोगा मदनवाड़ा-सीतागांव सड़क बनने के पहले के दौर को याद करते हैं और कहते हैं बारिश के चार महीने तो जेल मान के चलो, नरक की जिंदगी बीतती थी। अब सड़क बनने के बाद बारिश में भी 15 मिनट में मानपुर पहुँच जाते हैं। आवागमन सुगम होने से जीवन सहज हो गया है। सुमेर कहते हैं बाइक तो सबके घर साइकिल टाइप हो गया है। सुमेर के घर में पहुँचने पर वहाँ डीटीएच कनेक्शन की छतरी दिखती है। यह कनेक्शन किसका है पूछने पर उसने बताया कि टाटा स्काई का है।

अंदर अमेरिकन फिल्म स्पाइडर मैन होम कमिंग चल रही थी। बच्चे टॉम हालैंड द्वारा निभाये गए पीटर पार्कर के चरित्र को और न्यूयार्क शहर के फिल्मांकन को बहुत उत्सुकता से देख रहे थे। बच्चों ने पूछने पर बताया कि यहाँ बिजली की समस्या नहीं है इसलिए छुट्टियों में टीवी देखते हैं। सुमेर ने ट्रैक्टर लिया है और गाँव में किराये से भी ट्रैक्टर चलाते हैं। सुमेर खुद तीसरी तक पढ़े हैं लेकिन बच्चे आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। गाँव में हाईस्कूल आरंभ हो गया है और अब हायर सेकेंडरी तक अपडेट होने जा रहा है। इस बार मदनवाड़ा स्कूल में 37 बच्चे हैं। उपस्वास्थ्य केंद्र खुलने से इलाज में भी काफी सुविधा हो रही है। यह केंद्र अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बदल गया है। संस्थागत प्रसव तेजी से बढ़ गया है। सुगुन बाई बताती हैं कि सड़क बन जाने के बाद 108 और 102 आ जाती है। मोबाइल टॉवर होने की वजह से यहाँ से फोन लगाने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। गाँव की गलियाँ सोलर स्ट्रीट लाइट से रोशन है।

सुमेर ने बताया कि इस बार फसल अच्छी नहीं हुई, उसने फसल बीमा कराया था इसलिए फसल बीमा की राशि भी मिली और सूखा राहत भी मिला। इसके साथ ही गाँव में इस बार मनरेगा का काम भी भरपूर हुआ। सुमेर ने बताया कि गाँव में 50 घर के लोग मनरेगा काम में लगे थे और 150 लोगों की मजदूरी बनी। भूमि समतलीकरण और डबरी में अच्छा काम हुआ। तेंदूपत्ता के कार्य से लौटीं सावित्री बाई ने बताया कि उसका खाता मानपुर के इलाहाबाद बैंक में है। अब गाँव में कुछ लोग मशीन लेकर आते हैं। उससे मनरेगा मजदूरी, पेंशन का पैसा बैंक खाते से निकाल कर दे देते हैं। इसके लिए मानपुर नहीं जाना पड़ता। रासो बाई ने बताया कि ये लोग हर दिन आते हैं केवल शनिवार और रविवार को नहीं आते। हम लोग इनसे 20 हजार रुपए तक पैसा निकाल सकते हैं।

पैसा निकालने के बाद ये रसीद भी देते हैं। उल्लेखनीय है कि मानपुर ब्लाक के 35 गाँवों में आईडीएफसी बैंक द्वारा माइक्रोएटीएम की सुविधा प्रदाय की गई है जिससे बैंकिंग इन गाँवों के लोगों के लिए सहज हो गई है। मदनवाड़ा एक तरफ  सीतागांव से सड़क से जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर मलहार-बसेली-सहपाल की ओर से पीएमजीएसवाय सड़क से भी जुड़ा है। इन दोनों सड़कों ने मदनवाड़ा को टापू जैसी स्थिति से बाहर कर दिया है। पास के गाँव से सुमेर से मिलने पहुंचे सगनु ने बताया कि पखांजूर के बाजार से भी अब व्यवसायियों के लिए मदनवाड़ा आने में दिक्कत नहीं रही। इसके चलते साप्ताहिक बाजार में हर सामान आसानी से मिल जाता है। गांव में 78 परिवारों को उज्ज्वला के गैस सिलेंडर मिले हैं। रासो बाई ने बताया कि गैस बहुत दिन चलता है इससे जल्दी से खाना तैयार हो जाता है।

18 करोड़ रुपए की लागत से बनी  सीतागांव-मदनवाड़ा सड़क से हालात में क्रांतिकारी सुधार हुआ है। 15 किमी लंबी इस सड़क का कार्य कड़ी चुनौतियों के बीच वर्ष 2014 में आरंभ हुआ। दो साल में इस सड़क का काम पूरा हुआ। इस सड़क में एक बड़े पुल के साथ 27 छोटे-छोटे पुल भी बनाये गए हैं।

और स्टोरीज़ पढ़ें
से...

इससे जुड़ी स्टोरीज़

No items found.
© 2018 YourStory Media Pvt. Ltd. - All Rights Reserved
In partnership with Dept. of Public Relations, Govt. of Chhattisgarh