September 18, 2018

सामान्य सिंचाई के तरीकों से पीछे छोड़ अपनाई टपक सिंचाई की तकनीक, डोंगरगढ़ के कुर्रूभांठ के किसान ने बदली अपनी तकदीर

राजेश पटवा। डोंगरगढ़ ब्लॉक के रांका ग्राम पंचायत के कुर्रूभांठ गांव के ग्रामीण किसान। राजेश ने खेती में तकनीक का इस्तेमाल करके और खेती के तरीकों में बदलाव करके अपनी आर्थिक तरक्की की ओर कदम बढ़ाया है। किसानी के जरिए आर्थिक मजबूती कैसे प्राप्त की जा सकती है, यह राजेश के काम से बेहतर सीखा जा सकता है। एक समय था, जब राजेश पारंपरिक खेती करते थे, इसका नुकसान भी उन्हें उठाना पड़ता था। कई बार फसल की लागत राशि भी बड़ी मुश्किल से निकल पाता था। लेकिन राजेश के दिन बदले। उन्हें शासन की उस योजना की जानकारी मिली, जिससे वे आर्थिक सहायता के जरिए खेती में बदलाव कर सकें। उनका गांव चूंकि रूर्बन मिशन के अंतर्गत चयनित गांव था, इसका भी उन्हें फायदा मिला।

राजेश 2.266 हेक्टेयर में खेती करते हैं। इन्होंने ड्रीप एरिगेशन यानी टपक सिंचाई को अपनाकर आसपास के किसानों के लिए एक रास्ता तैयार किया है। जिला राजनांदगांव के डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम कुर्रूभांठ में रूर्बन मिशन की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई। योजना के अनुसार सभी विभागों का क्रियान्वयन कर ग्रामीणों को लाभ पहुंचाया जाना था। इस लक्ष्य को लेते हुए ग्रामीण किसान राजेश पटवा पिता इतवारी पटवा के 2.266 हेक्टेयर जमीन पर उन्नत कृषि कार्य को लेकर प्रेरित किया गया, जिसमें पिता इतवारी पटवा के 1.282 हेक्टेयर जमीन पर टपक सिंचाई के लिए 1.200 हेक्टेयर पर कोटेशन राशि 100580 रुपए तय हुआ। इसके बाद पीएमएसएसवाय प्रचलित इकाई लागत पर 60 फीसदी अनुदान राशि 60,348 रुपए प्रचलित योजनांतर्गत कृषक अंश 1,13,376 व रूर्बन मिशन अंतर्गत प्रचलित कृषक अंश राशि का 80 फीसदी सहायता अनुदान राशि 90,700.8 रुपए दिया गया। इस तरह कुल अनुदान राशि 151048.8 रुपए प्रदान किए गए। इस राशि के जरिए किसान के खेत में टपक सिंचाई संयंत्र की स्थापना की गई। इससे पहले वे खेती योग्य जमीन होने के बाद भी पानी के सही तकनीकी तरीके से उपयोग न होने के कारण किसान उस जमीन में उन्नत कृषि का लाभ नहीं ले पा रहे थे, लेकिन अब उसी जमीन पर अब फसलोत्पादन में वृद्धि हुई है।

रूर्बन मिशन के अंतर्गत संयंत्र स्थापना के बाद पूर्व उद्यानिकी तकनीकी विभागों ने मार्गदर्शन देकर परंपरागत कृषि से हटकर व्यावसायिक कृषि की ओर राजेश को अग्रसर किया। इसके अनुसार कृषक ने प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष एक ही प्लाट में 3-4 बार सब्जी फसल का उत्पादन कर अपनी आमदनी में 3 से 4 गुना तक बढ़ोतरी कर ली। पहले धान, गेहूं, चना, सरसों लिया जाता था, जिससे राजेश की आय 65,000 रुपए थी, लेकिन अब सब्जी करेला, खीरा, मिर्च, टमाटर, बरबट्‌टी, बैगन की फसल ली। इससे उन्हें 1,45,000 रुपए का लाभ हुआ। सब्जी उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए फसल परिवर्तन, फसल की सघनता व पानी का सही समय में सही मात्रा में दिया जाना जिम्मेदार थे। टपक सिंचाई से पानी की बचत व मजदूरी की बचत हुई और आय में वृद्धि हो गई। उत्पादित सब्जियों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ राजेश ने गोंदिया, आमगांव, शहर में बेचा गया। इसमें करेला व मिर्च 2,45,000 प्रति हेक्टेयर व खीरा और टमाटर में 2,55,000 प्रति हेक्टेयर लाभ हुआ। इस योजना के तहत इनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो गई। अब किसान ने क्षेत्र में जैविक खेती का उपयोग भी शुरु कर दिया है।


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