September 11, 2018

‘चुप्पी तोड़ो’ अभियान के जरिए पीरियड्स की भ्रांतियों को दूर कर बनीं बदलाव की नायिका, अपनी आजीविका भी खड़ी की

35 साल की हैं धनेश्वरी साहू। राजनांदगांव में रहने वाली धनेश्वरी के घर में पति धनेश व 3 बच्चे हैं। बेटा 18 साल का है और 11वीं में पढ़ता है। एक बिटिया 14 साल की है जो 10 वींमें है और दूसरी बिटिया 12 साल की है और कक्षा छठवीं में पढ़ती है।

पति अस्पताल में सिक्यूरिटी गार्ड का काम करते हैं। पति की तनख्वाह इतनी न थी, कि सही तरीके से परिवार का भरण पोषण किया जा सके। किसी तरह बच्चों की पढ़ाई चल रही थी। पति को 5 से 8 हजार रुपए तक आमदनी होती थी। जरूरत पड़ने पर खेत जाकर मजदूरी भी करते थे। धनेश्वरी एक महिला समूह से जुड़ीं, तो इन्हें विहान समूह के जरिए सेनेटरी पैड के जागरूकता अभियान का पता चला। उन्हें यह भी पता चला कि इससे सेनेटरी पेड की ब्रांडिंग कर वे अपने परिवार के भरण-पोषण में पति की मदद कर सकती हैं। वे भी इस अभियान जुड़ गईं। सेनेटरी पैड की पैकेजिंक कर उन्हें महिलाओं तक पहुंचाने का काम करने लगीं। 22 रुपए के इस पैकेट में से 2 रुपए समूह की महिलाओं के हिस्से में आता। इसके जरिए ही धनेश्वरी को महीने में 8हजार की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। उनकी परिस्थिति सुधरने लगी। ऐसी ही कहानी कई महिलाओं की है, जो दूसरी महिलाओ को जागरूक करने में जुटी हुई हैं।

कुछ समय पहले एक फिल्म आई “पैडमैन”। जिस नायक पर यह फिल्म बनी वह थे तमिलनाडु के अरुणाचलम मुरुगानन्थम। उन्होंने महिलाओं के “उन दिनों” जैसी परिस्थिति को बदलने और इस दिशा में जागरूकता लाने के उद्देश्य से जो काम किया, वही काम आज राजनांदगांव की बहुत-सी महिलाएं आगे बढ़कर कर रही हैं। महिलाएं चुप्पी तोड़ो अभियान चला रही हैं। वह अभियान जिसने राजनांदगांव में महिलाओं के पीरियड्स की भ्रांतियों को दूर करने व इस दौरान स्वच्छता को अपनाने में न सिर्फ मदद की, बल्कि पूरे समाज को पूरी सजगता के साथ जागरूक भी किया। इतना ही नहीं इसी अभियान का परिणाम है कि बड़ी संख्या में महिलाओं की आजीविका का मुख्य स्रोत सेनेटरी पैड हो चुका है।

ऐसे ही अभियानों का नतीजा है कि राजनांदगांव को स्वच्छ भारत मिशन के तहत अचीवमेंट हासिल हुआ है। पहले जिला सेनेटरी नेपकिन के उपयोग को लेकर बहुत पीछे था। इसके बाद जागरूकता शिविर ग्राम पंचायतों व शहरी क्षेत्रों में लगाए गए। दूरस्थ अंचलों से लेकर शहर तक सिनेमा हाल समेत अलग-अलग माध्यमों से जागरूकता अभियान शुरु हुआ। महिलाओं को पैडमैन फिल्में दिखाई गईं। इसके बाद महिलाओं को पता चला कि पैड क्या है।

महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को सरकार की योजनाओं के आधार पर ऋण मिले और इससे ही वे नागपुर से सेनेटरी पैड मंगा रहे हैं। वे इसकी ब्रांडिंग खुद कर रही हैं और इससे उन्हें रोजगार का एक जरिया मिल गया है। एनआरएलएम की योजनाओं व महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं से सस्ते ब्याज पर इन महिला समूहों को ऋण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वच्छता की यह मुहिम अब भी लगातार जारी है।

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