October 15, 2018

टीचर बने एसपी तो गामिनी हुई इंप्रेस, अब वर्दी पहनकर करना चाहती है देश की सेवा 11वीं की छात्रा हैं गामिनी, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी और हिंदी विषयों में है रुचि

सरकार की सरस्वती साइकिल योजना का फायदा देखिए। झलमला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली गामिनी का डर चला गया। अब वह दूसरी लड़कियों का डर भगाना चाहती हैं। पुलिस में जाना चाहती हैं। उन्हें सुरक्षा देने का लक्ष्य रखा है। बालोद के पुलिस अधीक्षक ने उन्हें काफी इंप्रेस किया है। वे स्कूल में इकोनॉमिक्स पढ़ाने आथे और मोटिवेशनल स्पीच देते थे। बहुत सी छात्राएं प्रेरित हुईं, उनमें से एक गामिनी भी थी। गामिनी का कहना है कि वह वर्दी पहनकर समाज की सेवा कर सकती है और लड़कियों की सहायता भी।

कक्षा 11वीं में कला की छात्रा गामिनी राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी और हिंदी में काफी रुचि रखती हैं। इससे पहले जब हाईस्कूल में उनका दाखिला हुआ, तब गांव से झलमला तक आने के लिए कोई संसाधन नहीं था। इसके चलते उसे निराशा हाथ लगती थी। कई बार तो लगा कि पढ़ाई ही छोड़ दे, लेकिन सरकार ने सरस्वती साइकिल योजना के तहत उसे साइकिल दिया और उसकी रुचि बढ़ा दी। अब वह लक्ष्य साधकर मेहनत कर रही है। गामिनी का कहना है कि वह बहुत मेहनत करेगी और पुलिस में भर्ती होगी।

यह उसके परिवार के लिए भी बेहतर होगा। गामिनी के पिता हरदेला निर्मलकर पेशे से किसान हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर मिस्त्री का काम भी कर लेते हैं। मां उषा बाई मजदूरी कर पिता का हाथ बंटाते हैं। बहन दुर्गेश्वरी 10वीं कक्षा में पढ़ रही है। भाई राजीव 8वीं का छात्र है। दोनों अपनी बहन से बेहद प्यार करते हैं और गामिनी भी उन्हें पढ़ाई में मदद करती है। वह कहती है मैं पढ़ूंगी और अपने भाई-बहन को भी पढ़ाऊंगी। सरकार ने साइकिल देकर हौसला बढ़ाया। पहले रास्ते पर पैदल चलने में डर लगता था। अब नहीं लगता।

लड़कियों को कम से कम बारहवीं तक शिक्षा दी जा सके इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की लड़कियों को जो 9वीं कक्षा में हैं या जो 18 साल से ऊपर की हैं, उनको फ्री में साइकिल प्रदान करने के लिए ही यह योजना बनाई। इसी तरह राज्य के आदिवासी लोगों का विकास करने के लिए तथा छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए शैक्षिक विभाग ने आदिवासी जाति कल्याण विभाग के साथ हाथ मिलकर कक्षा आठ के बाद अपनी उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए फ्री में साइकिल प्रदान करता है।

गामिनी के जैसी कितनी ही लड़कियां हैं जो गांव से पैदल स्कूल जाने से डरती थीं, लेकिन सरस्वती साइकिल योजना के कारण उनकी आवाजाही आसान हुई और उनके मन से डर निकल गया। सरकार के ऐसे कदमों के परिणाम के रूप में, स्कूल छोड़ने वाले छात्रों के प्रतिशत में काफी हद तक कमी आई है। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं का साक्षरता प्रतिशत भारत में औसत साक्षरता दर बढ़ रहा है। 2011 की जनगणना से पता चलता है कि महिला साक्षरता दर में लगभग दस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसी कोशिशों से और योजनाओं के साथ, हम देश भर में महिला साक्षरता दर में और अधिक वृद्धि करने की उम्मीद कर सकते हैं।

इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाली लड़कियों की संख्या हजारों में है। लड़कियों को फ्री में साइकिल पाने के लिए 8 वीं पास होना जरूरी है। राज्य की डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी)छात्राओं को फ्री में साइकिल प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति व बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों की लड़कियों को ही इस योजना के तहत फ्री में साइकिल दी जा रही है।

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