October 29, 2018

तमन्ना थी अपने घर की, प्रधानमंत्री आवास योजना ने पूरा किया सपना, धमतरी मगरलोड के करेलीबड़ी गांव के रहने वाले संतोष कुमार विश्वकर्मा की कहानी

अपना घर तो हर आदमी का सपना होता है। फिर चाहे वह दिहाड़ी मजदूर हो या अरबपति व्यवसायी। आखिर रोटी और कपड़े के बाद जीवन की तीसरी आवश्यकता में मकान को ऐसे ही शुमार नहीं किया गया है। हां, हैसियत के हिसाब से आशियानाें के नाम भले बदल जाते हों, लेकिन सोच सभी की एक ही होती है। कोई फ्लैट खरीदता है तो कोई बंगला। वर्षों पहले ऐसा ही एक सपना संतोष कुमार विश्वकर्मा ने भी देखा। और उनका यह सपना पूरा किया प्रधानमंत्री आवास योजना ने।

धमतरी जिले में मगरलोड ब्लॉक के करेलीबड़ी निवासी संतोष मजदूरी करते हैं। रोज कमाना और रोज खाना। यही उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। जीवन तो ऐसे ही चल रहा था। मजदूरी के बाद जब शाम को घर लौटते तो कच्चे व जर्जर मकान को देखकर मायूस हो जाते। हर बार सोचते कि इस साल पक्का मकान बनवाउंगा। लेकिन अगले दिन फिर वही रोजी-रोटी की मशक्कत। बारिश में छत से पानी टपकता तो सारा सामान गीला हो जाता। परिवार को काफी मशक्कत करनी पड़ती। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते थे। जीना हराम हो जाता।

कच्चे मकान की हालत देख तनाव बढ़ने लगा था। पत्नी भी रोज टोकती थी, लेकिन आय उतनी नहीं थी कि पक्का मकान बनाया जा सके। कुछ पैसे जोड़े भी लेकिन इससे अाधा काम ही हो पाता। इसी दौर में संतोष को प्रधानमंत्री आवास योजना का पता चला। उन्होंने सरपंच और सचिव से मिलकर इसकी जानकारी हासिल की और आवेदन दिया। योजना के तहत उनके आवेदन को मंजूर किया गया। जैसे ही उसे स्वीकृति मिली संतोष को लगा कि अब वह अपना सपना पूरा कर सकेंगे।

प्रक्रिया शुरू हुई। आवास का नक्शा तैयार कर ले-आउट दिया गया। उसी के आधार पर 350 वर्गफीट में एक लाख 60 हजार रुपए की लागत से उनका खुद का घर बनकर तैयार हो गया। इसमें योजना के तहत एक लाख 20 हजार रुपए मिले। इसके अलावा मनरेगा के तहत मजदूरी के 15 हजार अलग से दिए गए। बचे 25 हजार में से 10 हजार की जमा पूंजी संतोष के पास थी और 15हजार रुपए कर्ज लेकर उन्होंने अपने हिसाब से अपना मकान बनवाया है। आज उनकी खुद की जमीन पर खुद का मकान बनकर तैयार है।

संतोष का कहना है कि उनका सपना पूरा हुआ। मैं सुंदर घर बनाना चाहता था। बना लिया। यह संभव हो सकता प्रधानमंत्री आवास योजना से। आज हम पक्के मकान में खुशी-खुशी जीवन बिता रहे हैं। मैंने तो केवल सपना देखा था, लेकिन इसे पूरा करने में गांव के सरपंच, सचिव, तकनीकी सहायक, आवास मित्र आदि सभी जुट गए। आज बारिश के दिनों में भी हमें तकलीफ नहीं होती। सारी चिंता दूर हो गई। अब वे अपने बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा को लेकर प्लानिंग कर रहे हैं।

संतोष कुमार विश्वकर्मा की ही तरह धमतरी जिले के मगलोड ब्लॉक में कई ऐसे हितग्राही हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री योजना का लाभ मिला है। इसके अलावा राज्य सरकार की अन्य योजनाओं से भी वे लाभान्वित हुए हैं। रसोई गैस ने महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या हल कर दी है। गांव वालों का कहना है कि सरकारी की सभी योजनाएं गरीब परिवार के लिए कारगर साबित हुई हैं।

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