October 16, 2018

साइकिल मिलने से बढ़ा हौसला, अब पुलिस बनकर समाज की बुराइयां खत्म करना चाह रही है सीमा

सरकार की सरस्वती साइकिल योजना का लाभ देखिए, जो लड़की दूरी के कारण स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो रही थी, आज रोज आधे घंटे का सफर कर स्कूल आ रही है। उसने जमकर पढ़ाई करने की ठानी है और ग्रेजुएशन के बाद पुलिस की नौकरी करना चाह रही है ताकि समाज से भ्रष्टाचार और बुराईयों को खत्म कर सके। हम बात कर रहे हैं बालोद जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला झलमला में पढ़ने वाली साहेतरा गांव के सीमा निर्मलकर की।

सीमा के पिता कुलेश्वर निर्मलकर खेती-किसानी करते हैं और मां कीर्तिका घर के काम संभालती हैं। मिडिल स्कूल की पढ़ाई के बाद हाईस्कूल के लिए सीमा को साहेतरा गांव से झलमला तक की दूरी तक करनी पड़ रही थी। इस सफर में ही रोज एक घंटे का समय लगता था। सीमा ने तो लगभग सोच ही लिया था कि वह आगे नहीं पढ़ेगी। तभी उसे सरस्वती साइकिल योजना के तहत साइकिल गिफ्ट में मिली। अब गांव से स्कूल तक की दूरी तय करने में महज आधे घंटे ही लगते हैं। और ताे और वह अपने भाई शैलेंद्र और रविंद्र को भी कभी-कभी स्कूल छोड़ने के लिए चली जाती है। उनका हौसला बढ़ाती है।

दरअसल, वर्ष 2000 में भारत के कई अन्य राज्यों की तुलना में स्कूल छोड़ने वालों का अनुपात छत्तीसगढ़ में अधिक था। शैक्षिक वर्ष 2005-06 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार छत्तीसगढ़ में20% से अधिक छात्रों ने माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ दिया था। इसके बाद सरकार कई कदम उठा रही है कि कोई स्कूल ना छोड़े, जिनमें से सरस्वती साइकिल योजना भी एक उपाय है। सीमा को ही ले लीजिए, वह भी संसाधन के अभाव में पढ़ाई छोड़ने पर आमादा थी। अब रोज स्कूल आ रही है।

उसका कहना है कि पढ़ लिखकर पुलिस में भर्ती होना है। स्ट्रांग बनना है ताकि गुंडे बदमाशों को सबक सिखाया जा सके। वह सामाजिक बुराइयों को भी खत्म करना चाहती है। सीमा का कहना है कि ये सारे फैक्टर महिलाओं के विकास में बाधक हैं। सरकार की सरस्वती साइकिल योजना इस दिशा में कारगर कदम है। इससे लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब घर से बाहर आने-जाने के लिए वह किसी पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि घर के दूसरे कामों में भी परिवार का हाथ बंटाती है।

इधर सरकार द्वारा उठाए गए शिक्षात्मक कदमों के परिणाम के रूप में, स्कूल छोड़ने वाले छात्रों के प्रतिशत में काफी हद तक कमी आई है। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं का साक्षरता प्रतिशत भारत में औसत साक्षरता दर बढ़ रहा है। 2011 की जनगणना से पता चलता है कि महिला साक्षरता दर में लगभग दस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसी कोशिशों से और योजनाओं के साथ, हम देश भर में महिला साक्षरता दर में और अधिक वृद्धि करने की उम्मीद कर सकते हैं।

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