July 5, 2018

छत्तीसगढ़ के ज़रूरतमंद बच्चों का भविष्य संवार रहा है 'प्रयास फाउंडेशन स्कूल'

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों के प्रतिभावान बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए राज्य सरकार ने आज से 8 साल पहले प्रयास फाउंडेशन की स्थापना की थी। अभी हाल ही में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने रायपुर के सड्डू स्थित एजुकेशन सिटी का उद्घाटन किया। यहां पर बने आवासीय विद्यालय में ऐसे मेधावी बच्चे शिक्षा ले रहे हैं जिनकी पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि बहुत अच्छी नहीं है। नक्सल प्रभावित इलाकों में कई सारी समस्याएं हैं। उन समस्याओं की ये इलाके बाकी के क्षेत्र से विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ गए हैं। यहां के बच्चों को अच्छे अवसर देने के लिए सरकार ने प्रयास स्कूल की स्थापना की है।

छत्तीसगढ़ के दूरदराज के माओवादी हिंसा से प्रभावित गांवों और राज्य के सबसे हिंसक क्षेत्रों के बच्चों के लिए 'मुख्यमंत्री मंडल बाल सुरक्षा योजना' के विस्तार के रूप में राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2010 में 'प्रयास' आवासीय विद्यालय शुरू किए गए थे। यहां से पढ़ाई करने वाले छात्र आज आईआईटी, एम्स और आईआईएम जैसे शीर्ष संस्थानों में पढ़ाई कर अपना मुकाम हासिल कर रहे हैं। लेकिन इन सफल छात्रों को अगर प्रयास फाउंडेशन द्वारा शिक्षा नहीं दी जाती तो इनका भविष्य अंधकारमय ही रह जाता। प्रयास स्कूल में बच्चों को एंट्रेंस के माध्यम से चुना जाता है।

यहां 9वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होती है। हालांकि ये स्कूल छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के अंतर्गत ही संचालित होते हैं, लेकिन यहां सीबीएसई और एनसीआरटी पाठ्यक्रम से ही पढ़ाई होती है।

11वीं और 12वीं के छात्रों का यहां खास ध्यान रखा जाता है। उन्हें मेडिकल, इंजीनियरिंग और तमाम प्रवेश परीक्षाओं के लिए विशेषज्ञों द्वारा कोचिंग की सुविधा भी प्रदान करवाई जाती है। अभी प्रयास फाउंडेशन के तहत पूरे राज्य में 5 विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। ये रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग, जगदलपुर और बिलासपुर में चल रहे हैं। लेकिन रायपुर में चल रहे विद्यालय को हाल ही में शहर के किनारे छोर वाले इलाके में स्थानांतरित कर दिया गया।

4 मार्च को सीएम रमन सिंह ने इसका लोकार्पण किया। यह खूबसूरत कैंपस तमाम तरह की खूबियों और सुविधाओं से सुसज्जित है। 18 एकड़ में फैले विशाल कैंपस में छात्रों को वो सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं जो किसी भी बड़े नामी गिरामी बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को मिलती हैं। यहां पढ़ाई के साथ ही खेलकूद के लिए स्टेडियम, बास्केट बॉल, टेनिस कोर्ट, ओपन एयर जिम भी बनाया गया है। आज के दौर में इंटरनेट की क्या उपयोगिता है, इसके बारे में बताने की जरूरत नहीं है। बच्चों को कंप्यूटर की सारी जानकारी दी जाए और उन्हें इंटरनेट की दुनिया से भी जोड़ा जा सके इसके लिए 65 कंप्यूटरों वाला एक हाईटेक लैब भी बनाया गया है।

इस लैब में आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई करने वाले अध्यापक द्वारा शिक्षा दी जाती है। स्कूल में 500 छात्रों के रहने और पढ़ने की व्यवस्था है। छात्रों को प्रेरित करने के लिए स्कूल के हर कमरे में महापुरुषों की फोटो और उनके विचार पेंटिंग के रुप में दर्शाए गए हैं। स्कूल कैंपस की सभी खाली जगहों को ऑक्सीजोन के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऑक्सी जोन में बच्चे कहीं भी बैठकर पढ़ाई के साथ-साथ अन्य खेलकूद जैसे क्रियाकलापों के जरिए तमाम चीजें सीख सकेंगे। एजुकेशन सिटी में प्रयास विद्यालय के अलावा अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास तथा अल्पसंख्यक छात्रों के लिए हॉस्टल भी बनाया जा रहा है। आज प्रदेश के सभी पांच संभागों में चल रहे प्रयास विद्यालयों में बच्चों की संख्या साढ़े तीन हजार से ज्यादा हो गई है। इन सभी स्कूलों का संचालन डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (डीएमएफ) और आदिम जाति विकास विभाग की राशि से किया जा रहा है।

प्रयास विद्यालय में अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब के साथ ही फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी की सुसज्जित प्रयोगशालाएं भी हैं। यहां पर एक लाइब्रेरी की स्थापना की गई है जहां बैठकर सभी बच्चे एकसाथ पढ़ाई कर सकते हैं। पिछले सात वर्षों में प्रयास के इन स्कूलों ने कई सारे होनहार बच्चों को तराशा है। नियमित और निःशुल्क पढ़ाई के साथ ही कोचिंग सुविधा मिल जाने से अब तक 700 से भी अधिक बच्चों ने देश के सबसे प्रतिष्ठतम उच्च शिक्षा संस्थानों IIT, NIT इंजीनियरिंग कॉलेजों और मेडिकल कॉलेजों में जाकर पढ़ाई की है। अभी तक इन स्कूलों में 11वीं से प्रवेश मिलता था, लेकिन तब तक बच्चे काफी पिछड़ जाते थे, इसे ध्यान में रखकर अब 9वीं कक्षा से ही प्रयास स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।

राज्य के मुखिया रमन सिंह ने इस विद्यालय का लोकार्पण करते हुए कहा था कि हम सबका यह सपना है कि 'प्रयास' विद्यालयों के बच्चे अपनी मेहनत और प्रतिभा से देश और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचे, अच्छे नागरिक बनें और सरकारी अधिकारी बनकर भी राष्ट्र की सेवा करें। ये विद्यालय आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। अब इन स्कूलों का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में जशपुर और कोरबा में भी ऐसे ही स्कूल खोले जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बच्चे अपनी प्रतिभा को तराश कर जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकें।

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