September 24, 2018

नई औद्योगिक नीति से दिख रहा बदलाव, आकर्षित हुए देश-विदेश के निवेशक

कुछ ही सालों में देश-विदेश के निवेशकों के बीच छत्तीसगढ़ की अलग पहचान बनी है। यहां की खनिज संपदा और सरकार की नीतियों ने उन्हें आकर्षित किया है। यहां बस्तर का जिक्र करें तो वहां 24 हजार 826 करोड़ की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। नगरनार में एनएमडीसी के दो मिलीयन टन पेलेट प्लांट के लिए चार हजार करोड़ की परियोजना निर्माणाधीन है। इस साल उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इसके अलावा सेल की तीन मिलियन टन क्षमता वाले स्टील प्लांट, पेलेट प्लांट, 18 हजार करोड़ की स्लरी पाईप लाइन जैसी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बस्तर क्षेत्र में राइस मिल, पोहा मिल, ढाल मिल, बेकरी प्रोडक्ट, कोल्ड स्टोरेज, मेज सटार्च आदि उद्योग स्थापित हो रहे हैं। बस्तर और सरगुजा के औद्योगिक विकास से 14 सालों का बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी के तहत निर्यात संवर्धन के लिए कांपा में इनलैंड डिपो की स्थापना की गई है। कॉनकार ने नया रायपुर में 100 एकड़ भूमि पर 200 करोड़ रुपए के निवेश से मल्टी माडल लाजिस्टिक पार्क बनाने का प्लान किया और उसकी भी स्थापना जल्द ही हो जाएगी।

एक्सपोर्ट फेसिलिटेशन भी लगभग पूरा होने वाला है। राज्य शासन ने डायरेक्ट जनरल आफ फारेन ट्रेड को कार्यालय के लिए निशुल्क स्थान दिया है। हमारा राज्य चावल, स्टील, आयरन और इससे संबंधित उत्पाद निर्यात करने लगा है। वर्ष 2003-04 की अपेक्षा 2014-15 में सात हजार 230 करोड़ से अधिक का निर्यात किया गया, जो 38 प्रतिशत ज्यादा है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 19 करोड़ 14 लाख रुपए का बजट बढ़ाकर 2017-18 में 298 करोड़ रुपए कर दिया। इस अवधि में 714 रुपए का अनुदान विभिन्न उद्योगों को वितरित किया गया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हम 2015 और 2016 में लगातार पूरे देश में चौथे स्थान पर रहे। स्टार्टअप इंडिया की तरह प्रदेश के युवाओं को नवाचार के लिए प्रेरित करने स्टार्टअप छत्तीसगढ़ शुरू किया गया। इससे लगभग 3000 प्रस्ताव मिले और 36 पर केंद्र सरकार की मदद से आगे बढ़ने का काम किया जा रहा है। इसी तरह पिछले 14 सालों में 13 हजार 889 फर्म एवं 70 हजार 56 समितियों का पंजीयन किया गया और शासन को इससे 105 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। इससे पता चलता है कि नए उद्योग खोलने के लिए प्रदेश का युवा दृढ़ संकल्पित है। सरकार ने छत्तीसगढ़ में उद्योगों के भविष्य को लेकर भी प्लानिंग कर रखी है। इसके लिए दो हजार 953 हेक्टेयर भूमि लैंड बैंक के रूप में उपलब्ध है।

इससे पहले 14 सालों में छह हजार 839 हेक्टेयर भूमि आबंटित की जा चुकी है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 177 उद्यमियों को 32 हेक्टेयर भूमि आबंटित की गई है। छोटो उद्योगों को भी प्रोत्साहित करने नीति बनाई गई है। देखा जाए तो 14 सालों में 14 हजार 976 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना की गई। इनकी स्थापना में तीन लाख 77 हजार 130करोड़ रुपए का पूंजी निवेश हुआ। एमएसएमई अगर डेढ़ लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला। अगर औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग में दाखिल आईईएम संख्या पर गौर करें तो इससे प्रगति का सटीक आकलन किया जा सकता है। इसके अनुसार एक लाख 123 निवेशकों से 13 लाख 34 हजार करोड़ के आईईएम दाखिल हुए। उद्योगों के लिए अच्छा वातावरण बनाने के लिए रेल कनेक्टिविटी पर ध्यान दिया गया। इसके लिए सरकार ने रेल बजट के स्थान पर पीपीपी मॉडल से रेल लाइन विकास की शुरुआत की। फिलहाल प्रदेश में रेल लाइन की कुल लंबाई 1196किमी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की नई सोच से आने वाले पांच सालों में 1310 किमी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी।

इससे यात्री गाड़ियों के संचालन के साथ ही कोयला और लाह अयस्क परिवहन में सुविधा होगी। इसके अलावा राज्य में 20 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए गए। इनमें विशिष्ट औद्योगिक पार्क जैसे दुर्ग हथखोज का इंजीनियरिंग पार्क और रावांभाठा का मेटल पार्क शामिल है। वाणिज्य एवं उद्योग और वाणिज्य कर विभाग ने सामाजिक सरोकार का भी काम किया है। इसके तहत नशे के खिलाफ जन जागरण के लिए भारत माता वाहिनी का गठन प्रमुख है। राज्य सरकार ने 2016-17 से देशी-विदेशी मदिरा दुकानों का संचालन करने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड का गठन किया है। इसके तहत प्रदेश में 693 दुकानों का संचालन किया जा रहा है। इससे पहले 2011 में राज्य के सभी 10 हजार 971 ग्राम पंचायतों में भारत माता वाहिनी का गठन किया गया ताकि लोगों को नशे के खिलाफ अहिंसात्मक तरीके से समझाइश दी जा सके। इस तरह सरकार धीरे-धीरे शराब बंदी की ओर अग्रसर है।

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