September 18, 2018

कइयों की सालों से दबी मनोकामना पूर्ण कर रही है मुख्यमंत्री तीर्थ-यात्रा योजना अब तक 2.31 लाख से ज्यादा बुजुर्गों और दिव्यांगों ने किया निःशुल्क तीर्थाटन तीन हजार से ज्यादा दिव्यांगजनों ने भी तीर्थ यात्रा की

मुख्यमंत्री तीर्थ-यात्रा योजना की वजह से कई लोगों की सालों पुरानी इच्छा पूरी हो रही है। गरीबी या फिर धन के अभाव की वजह से तीर्थ-यात्रा न कर पाने वाले लोगों के लिए यह योजना वरदान मानी जा रही है। इस योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के निवासी वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 वर्ष या अधिक आयु के लोगों को उनके जीवनकाल में एक बार, प्रदेश के बाहर स्थित विभिन्न नामनिर्दिष्ट तीर्थ स्थानों में से किसी एक या एक से अधिक स्थानों की यात्रा सुलभ कराने हेतु शासकीय सहायता प्रदान करना है।

यह योजना वैसे लोगों के लिए ही है जोकि अपने जीवन काल में प्रदेश के बाहर किसी प्रमुख तीर्थ-स्थल न गये हों। आंकड़े बताते है कि वर्ष 2012-13 में योजना प्रारंभ होने के बाद अब तक 255 तीर्थ यात्राओं के माध्यम से 2 लाख 31 हजार 591 बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से देश के विभिन्न तीर्थों का निःशुल्क भ्रमण करवाया गया है। इनमें से छह यात्राएं दिव्यांगजनों के लिए आयोजित की गयी थीं। इन यात्राओं में तीन हजार 82 दिव्यांगजनों ने देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। उनके सहयोग के लिए दो हजार 156 सहायकों और 233 अनुरक्षकों को भी भेजा गया था।  इस योजना की शुरूआत 15 जनवरी, 2013 को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा राजधानी रायपुर के रेल्वे स्टेशन विशेष रेलगाड़ी को हरी झण्डी दिखाकर की गई थी।

प्रथम वर्ष 2012-13 में 15 यात्राओं में 14 हजार 390, वर्ष 2013-14 में 66 यात्राओं के जरिए 57 हजार 462 और वर्ष 2014-15 में 37 यात्राओं के जरिए 32 हजार 729 लोगों को तीर्थ करने का अवसर मिला। वर्ष 2015-16 में 49 यात्राओं के जरिए 45 हजार 624, वर्ष 2016-17 में 38 यात्राओं के जरिए 34 हजार 729, वर्ष 2017-18 में 39 यात्राओं के जरिए 36 हजार 366 और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 में 11 यात्राओं के जरिए 10 हजार 291 वरिष्ठ नागरिकों ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई विशेष रेल गाड़ियों में देश के विभिन्न तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया।

वर्ष 2018-19 के लिए इस योजना के अंतर्गत 46 करोड़ की राशि का व्यय संभावित है। मुख्यमंत्री तीर्थ-यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों और दिव्यांगों ने वैष्णो देवी,  मथुरा, वृंदावन,  पुरी जगन्नाथ, ओम्कारेश्वर, उज्जैन, कामाख्या मंदिर, अजमेर शरीफ, पुष्कर, द्वारिका, सोमनाथ, नागेश्वर, अमृतसर,फतेहपुर चिस्ती की दरगाह, हरिद्वार, ऋषिकेश, भारत माता का मंदिर,  सम्मेद शिखर, रामेश्वर, मदुराई, तिरुपति, स्वर्ण बेलगोला, शिरडी शनि सिगनापुर, बाबा बैजनाथ धाम,प्रयाग काशी, अमृतसर स्वर्ण मंदिर, बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम, बाबाधाम, बोधगया, गंगा सागर, बिरला मंदिर, कालीघाट, तख्तश्री पटना साहेब, श्रवण बेलगोला जैसे पवित्र स्थानों और तीर्थ-स्थलों के दर्शन करवाए गये हैं।


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