August 8, 2018

कबीरधाम के इस किसान ने खेती से की अपनी आय दोगुनी

देश के कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत की बदौलत अभी से अपनी आय दोगुनी कर ली है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के एक साधारण किसान ने समन्वित कृषि प्रणाली और उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर पिछले पांच वर्षों में अपनी आमदनी कई गुनी कर ली है।

कोको गांव के रहने वाले शिव कुमार ने कक्षा आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद गांव में ही टेलरिंग का कार्य शुरू किया। लेकिन जमीन से जुड़े शिव कुमार का मन खेती में लगता था। उन्होंने टेलरिंग के साथ-साथ खेती में भी हाथ आजमाना शुरू किया।

कुछ माह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार ने 2022 तक किसानों की आय बढ़ाकर दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कृषि क्षेत्र का बजट दोगुना करके 2.12 लाख करोड़ रुपये करने का भी फैसला किया। लेकिन देश के कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत की बदौलत अभी से अपनी आय दोगुनी कर ली है। प्रधानमंत्री द्वारा देश के किसानों की आय 2022 तक दोगुनी किये जाने की संकल्पना को साकार करने के लिए जहां भारत सरकार और राज्य सरकारों के कृषि विभाग तथा कृषि वैज्ञानिक प्रयासरत हैं वहीं छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के एक साधारण किसान ने समन्वित कृषि प्रणाली और उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर पिछले पांच वर्षों में अपनी आमदनी कई गुनी कर ली है।

इस किसान का नाम है शिव कुमार चन्द्रवंशी। एक तरफ जहां किसान अपने खेतों में एक फसल लगाकर घर बैठ जाते हैं वहीं शिव कुमार ने खेती के साथ ही पशुपालन और कुक्कुटपालन जैसे व्यवसायों में भी अपना हाथ लगाया और सफलता हासिल की। उन्होंने इसमें कृषि विज्ञान केन्द्र कबीरधाम की भी मदद ली। कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अपनी 6 एकड़ भूमि पर धान, सोयाबीन और चने की परंपरागत खेती के स्थान पर ड्रिप सिंचाई पद्धति से केला, पपीता, चुकंदर और सब्जियों की खेती के साथ-साथ डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन को अपनाकर अपनी आय प्रति वर्ष 40 हजार की बजाय 4 लाख रुपये कर ली है।

कोको गांव के रहने वाले शिव कुमार ने कक्षा आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद गांव में ही टेलरिंग का कार्य शुरू किया। लेकिन जमीन से जुड़े शिव कुमार का मन खेती में लगता था। उन्होंने टेलरिंग के साथ-साथ खेती में भी हाथ आजमाना शुरू किया। उन्होंने लगभग 6 एकड़ पैतृक भूमि पर परंपरागत विधि से धान, सोयाबीन और चने की खेती प्रारंभ की जिससे उन्हें प्रति वर्ष 40-50 हजार रूपये आय होने लगी। इसी बीच वर्ष 2012-13 में कृषि विज्ञान केन्द्र कबीरधाम के वैज्ञानिकों के संपर्क में अपने के बाद श्री शिव कुमार ने उनकी सलाह पर समन्वित कृषि प्रणाली तथा नवीनतम कृषि तकनीकों को अपनाया और फसल विविधिकरण कर केले, पपीते, चुकंदर और सब्जियों की खेती ड्रिप इरिगेशन पद्धति से शुरू की।

ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई करने पर पानी की तो बचत होती ही है, सिंचाई का खर्च कम होने से लाभ भी बढ़ जाता है। सिंचाई की यह विधि मुख्यतः पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी में अधिक प्रचलित है। लेकिन अब छत्तीसगढ़ में भी इसे आजमाया जा रहा है। टपक विधि से खेत की सिंचाई के लिए जरूरत के अनुसार ही बूंद-बूंद पानी मिलता है। इससे न तो फसल बर्बाद होने की चिंता रहती है, न ही भूजल का दुरुपयोग होता है। पौधों की जड़ तक जाने वाली बूंद-बूंद जल की अहमियत बढ़ती जा रही है।

इसके साथ ही उन्होंने डेयरी, गोटरी और पोल्ट्री का कार्य भी शुरू किया। उन्होंने अपने सभी खेतों पर ड्रिप पद्धति को अपनाया। शिव कुमार अपने फार्म पर ही अजोला एवं अन्य हरे चारे का उत्पादन भी करते हैं जिससे पशु पालन की लागत कम होती है और दूध उत्पादन में वृद्धि होती है। वे फार्म पर केचुआ खाद का निर्माण भी करते हैं। शिव कुमार रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करते हैं तथा जैविक कीटनाशकों का अधिक उपयोग करते हैं। शिव को उनके द्वारा अपनाये गये नवाचारी प्रयासों के लिए गुजरात सरकार द्वारा गुजरात वाइब्रेन्ट समिट में तीन लाख रूपये का नगद पुरस्कार दिया गया था।

शिव कुमार परंपरागत किस्मों के बीजों के संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं जिसके लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने उन्हें पादप जिनोम संरक्षक कृषक सम्मान 2015 प्रदान कर एक लाख रुपये का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। श्री शिव कुमार को विगत दिवस कृषिमंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा भुईयां के भगवान एवं कृषक समृद्धि सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।

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