September 18, 2018

होंठ और तालू की सर्जरी के बाद मैया की मुस्कान से परिवार को मिली राहत, स्माइल ट्रेन एनजीओ की मदद से डॉ. सुनील कालड़ा ने किया ऑपरेशन

कटे-फटे होंठ के साथ जब मैया पैदा हुई तो परिवार घबरा गया। बेटी की ऐसी हालत देख खुशी काफूर हो गई। कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था, लेकिर सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें समझाया। बताया कि इसका इलाज है और सरकार ने इसके लिए योजना भी बनाई है। कुछ दिनों बाद एनजीओ स्माइल ट्रेन ट्राई ने मदद की। रायपुर में उसकी प्लास्टिक सर्जरी हुई। डॉ. सुनील कालड़ा ने सफल आॅपरेशन किया। मैया आज तीन साल की हो चुकी है और उसकी मुस्कान से परिवार वालों को राहत मिल रही है।

ये कहानी है कवर्धा के पेंडरीकला में रहने वाले रामराज चंद्राकर के परिवार की। उसकी चार बेटियां हैं, राधिका, रागिनी, मैया और तृप्ति। घटना तीन साल पहले की है। जब रामराज की पत्नी नंदिनी को प्रसव पीड़ा हुई, तब रामराज घर पर नहीं था। परिवार के बाकि सभी उसके साथ अस्पताल में थे। सभी डिलीवरी होने का इंतजार कर रहे थे। भीतर से रोने की आवाज आई। नर्स ने बताया बेटी हुई है, लेकिन उसका तालू नहीं है। होंठ कटे हुए हैं। परिवार वाले देखने गए। बच्ची की हालत देख विचलित हुए। रामराज को भी इस बात की खबर दी गई। वह भी अस्पताल पहुंचा। बेटी को देखते ही होश खो बैठा। परिवार वालों ने जैसे-तैसे संभाला।

इस समस्या का समाधान पूछने के लिए सभी पंडरिया सरकारी अस्पताल के डॉक्टर से मिले। डॉक्टरों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं। ऐसे मामलों के एक्सपर्ट हैं और आपकी बेटी पूरी तरह ठीक हो जाएगी। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि ऐसे बच्चों को लेकर सरकार की योजना भी चल रही है। सर्जरी के बाद बेटी एकदम नाॅर्मल हो जाएगी। डॉक्टर की बातों ने परिवार वालों को राहत दी। इसके बाद भी पिता का मन शांत नहीं हुआ। वह लगातार चक्कर काटता रहा। सरकारी अस्पताल में आकर जानकारी लेता रहा। विशेषज्ञों का पता पूछता रहा।

इस सर्जरी के लिए रामराज की मदद की स्माइल ट्रेन ट्राई एनजीओ ने। उन्होंने मैया का चेकअप कराया। प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुनील कालड़ा के पास लेकर गए। डॉ. कालड़ा ने सलाह दी और सर्जरी की तारीख भी बताई। उन्होंने आॅपरेशन किया। हमेशा की तरह नका अाॅपरेशन सफल रहा। सर्जरी के बाद अब मैया के होंठ जुड़ चुके हैं। वह दिल खोलकर हंसती है और सभी चीजें खाती-पीती है। रामराज का कहना है कि सरकार ने उसकी बहुत बड़ी मदद की। वह डॉ. कालड़ा की तारीफ करता नहीं थकता। कहता है कि उन्होंने बेटी की खूबसूरती लौटा दी। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।

मेडिकल साइंस इस बीमारी के लिए क्लेफ्ट शब्द का प्रयोग करता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह जन्मजात होता है। दुनियाभर में हर 700 में से एक बच्चा क्लेफ्ट लिप के साथ पैदा होता है। लेकिन आम आदमी इसकी सर्जरी का खर्च नहीं उठा सकता। इसलिए कबीरधाम में सरकार ने एक्शन प्लान बनाकर काम किया। कवर्धा, बोड़ला, पंडरिया और सहसपुर लोहारा के अस्पतालों में केस बनाए गए और कैटेरेक्ट, क्लब फुट और क्लेफ्ट लिप कबीरधाम की मुहिम छेड़ी गई। आज कटे-फटे होठ, क्लब फूट और मोतियाबिंद के कई मरीजों का इलाज हो चुका है।

और स्टोरीज़ पढ़ें
से...

इससे जुड़ी स्टोरीज़

No items found.
© 2018 YourStory Media Pvt. Ltd. - All Rights Reserved
In partnership with Dept. of Public Relations, Govt. of Chhattisgarh