October 1, 2018

दूसरी गन्ना फैक्ट्री के आने से किसानों का उत्साह हुआ दुगुना

गन्ने की खेती को लेकर किसान काफी उत्साही हैं। पंडरिया में दूसरा कारखाना खुलने के बाद तो उनका उत्साह दोगुना हो गया है। वैसे भी पिछले 14 सालों में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ा है। भोरमदेव कारखाना खुलने के बाद किसानों का ध्यान पारंपरिक खेती से हटने लगा था। अब जिले में 21 हजार से अधिक किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। इस साल 11 लाख 16 हजार टन गन्ने के उत्पादन का अनुमान है। हर साल इसमें इजाफा हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय किसान संघ ने एक और फैक्ट्री खोलने की मांग रखी है।

गन्ने की खेती करने वाले जयचंद्र वर्मा का कहना है कि उनके पास 6 एकड़ खेत है। इसमें से आधे में वे गन्ना लगा रहे हैं और बाकि आधे में धान बो रहे हैं। जयचंद का कहना है कि गन्ने की खेती से सभी किसानों को फायदा हुआ है। वे खुद मुनाफा कमा रहे हैं। पहले तो फसल की लागत ही मुश्किल से निकल पाती थी। अब आमदनी होने लगी है। ज्यादातर किसान अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा खेत खरीदने में लगा रहे हैं। किसानों के उत्साह से आप समझ सकते हैं कि शुगर फैक्ट्री खुलने से खुशियां आई हैं।

पंडरिया में इस साल एक फैक्ट्री और खुलने के बाद किसानों का उत्साह दोगुना हुआ है। इससे उत्पादन भी बढ़ने के आसार हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए भारतीय मजदूर किसान संघ ने एक और कारखाना खोलने की मांग रखी है ताकि जिले के किसानों को लाभ हो सके। जयचंद्र का कहना है कि गन्ने की खेती ने कवर्धा, पंडरिया और सहसपुर लोहारा क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाया है।

पहले जो लोग छप्पर के मकान में रहते थे, उनकी छतें पक्की हो गईं। दुपहिया वाहन तो लगभग हर घर में मिल जाएंगे। यानी आवाजाही की परेशानी से भी छुटकारा मिल गया। पैदावार का उचित मूल्य मिला तो आमदनी बढ़ी। फिर सरकार ने प्रति क्विंटल 50 रुपए का बोनस भी दिया। इसने किसानों को प्रोत्साहित किया। गन्ने से शक्कर तो बन ही रहा है, फैक्ट्री के पॉवर प्लांट में बिजली भी बन रही है। इस साल 168 लाख 52 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है।

किसानों के उत्साह को देखते हुए भोरमदेव सहकारी कारखाने के प्रबंधन ने ईथेनाॅल प्लांट का प्रस्ताव रखा है। इसका डीपीआर तैयार किया जा चुका है। शासन से सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है। वित्त विभाग से सहमति के लिए प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। प्लांट की क्षमता 40 केएलपीडी होगी। यानी शक्कर कारखाने से तो फायदा मिल ही रहा है। इथेनॉल प्लांट लगने के बाद कारखाने को भी प्रॉफिट होगा।

इस साल दोनों कारखानों को मिलाकर सात लाख 93 हजार पांच मेटरिक टन गन्ने की खरीदी हुई। इससे छह लाख 75 हजार 925 क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया गया। अगस्त तक की स्थिति में 50 रुपए प्रति क्विंटल की मान से गन्ना बोनस भी दिया गया। इसमें 39.65 करोड़ के विरुद्ध प्रथम किस्त में 28 करोड़ रुपए प्राप्त किए गए। सरकार चाह रही है कि गन्ने की खेती का रकबा बढ़े और इससे कबीरधाम जिले के किसानों काे फायदा मिले।

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