July 31, 2018

छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: शिशु जन्म के साथ शगुन में मिलता है पौधा

पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक बनाने की एक अनूठी पहल छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के सरकारी अस्पताल में की जा रही है। यह अनोखी पहल जहाँ लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बन गई है वहीं इसे सराहना भी खूब मिल रही है। दरअसल सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अपने अस्पतालों में आने वाले मरीजों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का निर्णय लिया है और जिले के प्रसूति गृहों में यह पहल खूब असर दिखा रही है। स्वास्थ्य विभाग अपने प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो में डिलीवरी के बाद डिस्चार्ज के समय प्रसूता महिलाओ को पौधे भेंट कर रहा है। विभाग का कहना है कि जिस तरह नवजात शिशु की देखभाल अच्छे से की जाए तो वह एक स्वस्थ शरीर के रूप में विकसित होता है, उसी तरह पौधों को भी जिम्मेदारी के साथ पोषित किया जाए तो वह भी एक शानदार वृक्ष का रूप लेते हुए पूरे समाज को भरपूर फायदा देता है।

जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो में विभाग के द्वारा प्रसूता माताओं को फलदार, छायादार पेड़ों के पौधे भेंट किये जा रहे हैं ताकि माताएं इन पेड़ों की पुत्र के समान परवरिश कर पर्यावरण को शुद्ध बनाने में मदद कर सकें। शहर के शंकरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में यह मुहिम विशेष रूप से चलाई जा रही है। प्रसूति के लिए आई महिलाओ का कहना है कि ये विभाग की एक अच्छी पहल है और वे अस्पताल से मिले पौधों को अपने बच्चे की तरह देखभाल कर बड़ा करेंगी और पर्यावरण में सहयोग करेंगी। साथ ही इन महिलाओं का कहना है कि लोगो को अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे। प्रसूति के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा पौधे मिलने पर पहले इन महिलाओं को माजरा समझ में नहीं आया लेकिन जब अधिकारियों ने पेड़ और पुत्र का महत्व इन माताओं को समझाया तो उन्होंने भी इस मुहिम की तारीफ की और अधिक से अधिक पेड़ लगाने तथा उनकी रक्षा करने का वचन भी दिया।

शहर के महापौर मधुसूदन यादव ने इस पहल को सराहनीय बताया है और कहा कि आज देश में पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए सबको आगे आना चाहिए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्टाफ नर्स दिलजीत जॉनसन का कहना है कि प्रसुताओं को बच्चा होने के साथ शुभकामनायें देते हुए हम पौधा भी प्रदान करते हैं और उन्हें बताते है कि पौधा मंगल और नवजीवन का प्रतीक होता है।

स्वास्थ्य विभाग के जिला मुख्यचिकित्सा अधिकारी मिथलेश चौधरी ने कहा की शिशु का जन्म किसी भी परिवार के लिए सबसे मंगल घटना होती है और इस घटना से जुडी सारी यादें परिवार सुरक्षित रखना चाहता है इसलिए हमने प्लांटेशन को इससे जोड़ दिया जिससे पौधा इन परिवारों की यादों से जुड़ा रहेगा और परिवार पौधे का उसी प्रकार ध्यान रखेगा जिस प्रकार बच्चे का रखा जाता है। इसके साथ ही पूरी पीढ़ी को पौधरोपण का सन्देश भी मिलेगा और इन प्रसूतिगृहों से निकलने वाली महिलाओं के घरों में बच्चा और पौधा बराबरी से बढ़ेगा। पर्यारण को बढ़ावा देने का यह अनूठा निर्णय स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कलेकटर की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया।

यह बैठक जिले में संस्थागत प्रसव को बेहतर करने के तरीकों पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक में यह बात सामने आई कि किसी भी परिवार में बच्चे का जन्म एक मंगलकारी घटना होती है तो इस घटना को यादगार बनाने के लिए कुछ अनोखी पहल की जानी चाहिए। तभी यह फैसला हुआ कि शिशु को जन्म देने वाली माता को शगुन के तौर पर बेबी किट के साथ पौधा भी दिया जाए। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह लगभग 1500 बच्चों का जन्म होता है। इस लिहाज से जिले में 1500 परिवारों में हर माह पौध संरक्षण किया जा रहा है।

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