September 24, 2018

चार मेडिकल कॉलेज खुले और 55.62 लाख को मिल रहा स्वास्थ्य बीमा का लाभ, प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में जुटी है छत्तीसगढ़ सरकार

समृद्ध प्रदेश का निर्माण करने के लिए स्वस्थ छत्तीसगढ़ बहुत जरूरी है और इस उद्देश्य के लिए स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग पूरी तन्मयता से काम कर रहा है। इन 14 सालों के दौरान चार मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हुई। अब कुल छह हैं। हरेक में ट्रामा यूनिट की स्थापना हो चुकी है। जगदलपुर, बिलासपुर और रायपुर में पीजी सीटें भी शुरू हो गईं। प्रदेश के 55 लाख 62 हजार परिवार राष्ट्रीय व मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं। सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य की चिंता की और विभाग ने विभिन्न योजनाओं को अमलीजामा कर स्वस्थ प्रदेश बनाने की दिशा में बेहतर काम किया। इसका परिणाम है कि 2001-02 में 341 करोड़ का बजट बढ़कर 2017-18 में 4376.92 करोड़ रुपए हो गया। यानी 13 गुना की वृद्धि हुई। इसी के चलते शिशु सुरक्षा और शिशु संरक्षण की दिशा में काम हुए। तकरीबन 10 साल पहले ओपीड़ी संख्या 43 लाख 17 हजार थी, आज दो करोड़ से ज्यादा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए 2013 में पुरस्कार मिला।

फिर 2015 में शिशु सुरक्षा के लिए तीसरा और शिशु संरक्षण के लिए दूसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसी तरह जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए भी विभाग को द्वितीय पुरस्कार से नवाजा गया। मातृ-शिशु सूचकांक में अच्छा प्रदर्शन करने पर जेआरडी टाटा अवार्ड भी मिल चुका है। सरकार केवल मरीजों के इलाज पर ही ध्यान नहीं दे रही है, बल्कि प्रदेश में अच्छे डॉक्टरों की उपलब्धता पर ध्यान दे रही है। यही वजह है कि आज प्रदेश में छह मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश में एबीबीएस की सीटें बढ़ाकर 1100 कर दी गई हैं। वर्ष 2000 में केवल एक डेंटल कॉलेज था। अब पांच प्राइवेट कॉलेज और खुल गए हैं। इनमें 600 सीटें हैं। इन कॉलेजों में इलाज की बेहतर व्यवस्था की दिशा में भी काम किया जा रहा है। जैसे रायपुर मेडिकल कॉलेज में कैंसर यूनिट की स्थापना की गई। बिलासपुर में राज्य कैंसर अस्पताल की स्थापना की गई। डीकेएस भवन रायपुर का सुपर स्पेशलिस्टी अस्पताल के रूप में उन्नयन एवं स्नातकोत्तर सीट प्रारंभ किया गया। मरीजों को अच्छे उपचार के साथ उचित मूल्य में दवा उपलब्ध कराने के लिए भी विभाग आगे है।

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस के जरिए मुफ्त व गुणवत्तायुक्त जेनेरिक दवाइयां अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश के 27 जिला अस्पतालों में अब तक 109 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। जहां से कम रेट में सारी दवाएं मिल रही हैं। गरीब परिवार को गंभीर बीमारी में मदद करने के लिए संजीवनी कोष बड़ा कारगर साबित हो रहा है। पहले इसके लिए बजट में सिर्फ पांच करोड़ का प्रावधान था, लेकिन 2016-17 में यह 32 करोड़ का हो गया। योजना के तहत 18हजार लोगों को आर्थिक सहायता दी गई ताकि बीमारी का इलाज हो सके। यही नहीं योजना के अंतर्गत 30 बीमारियों को शामिल किया गया है। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अस्पताल तक लाने के लिए भी विभाग प्रतिबद्ध है। इसी के चलते 108 संजीवनी एक्सप्रेस के 240 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक 14 लाख 66 हजार लोगों को इसका फायदा मिल चुका है। इसी तरह 350 महतारी एक्सप्रेस से 28 लाख 27 हजार हितग्राही लाभ ले चुके हैं। विभाग ने ऐसी सुविधा भी शुरू की है, जिससे लोग अपने बीमारी का लक्षण बताकर दवाएं ले सकें। इसे 104 आरोग्य सेवा का नाम दिया है।

फाेन पर 104 डायल करने के बाद मरीज परामर्श ले सकता है। अब तक 12 लाख से अधिक लोग चिकित्सकीय सलाह ले चुके हैं। बच्चों में मधुमेह की बीमारी को देखते हुए मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना शुरू की गई है। खुद डॉ. रमन सिंह ने 25 अगस्त 2017 को इसका शुभारंभ किया। इस योजना के तहत प्रतिवर्ष तीन करोड़ रुपए स्वीकृत किया जाता है। इसके हितग्राही शून्य से 14 साल तक के बच्चे हैं। वहीं 21 साल के पंजीकृत रोगियों को भी मुफ्त इंसुलिन दिया जाता है। अब तक दो सौं से अधिक बच्चों को मधुमेह किट दिया जा चुका है। इस योजना से नवजात शिशुओं को लाभ मिल रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए 80 हजार की जनसंख्या पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की है, जबकि सामान्य क्षेत्रों में एक लाख 20 हजार की जनसंख्या पर ही यह सुविधा दी जाती है। इसी तरह इन क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने 20 हजार और उपस्वास्थ्य केंद्र के लिए तीन हजार की जनसंख्या निर्धारित की गई है। सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है प्रदेश के सभी परिवारों को 50 हजार रुपए का निशुल्क स्वास्थ्य बीमा। इसके तहत प्रदेश का हर व्यक्ति लाभान्वित हो रहा है।

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