September 29, 2018

अब टीवी नहीं स्मार्ट फोन पर ही समाचार देख लेती हैं शमसीद, जानकारी इकट्‌ठा करने कर रही हैं संचार क्रांति के स्मार्ट फोन का उपयोग

दिनभर का थका हुआ हर आदमी चंद घंटे सुकून के गुजारना चाहता है। मनोरंजन करना चाहता है। देश-दुनिया के बारे में जानना चाहता है। खासतौर पर महिलाएं, जो घरेलू कामकाज में अपना सारा वक्त देती हैं। इन चीजों के लिए अब तक केवल टीवी ही एकमात्र जरिया हुआ करता था, लेकिन अब स्मार्टफोन ने इसका स्थान ले लिया है। बिलासपुर की रहने वाली शमसीद बेगम कहती हैं कि वे मोबाइल पर ही सारी खबरें देख लेती हैं। कभी भी, कहीं भी। इंटरनेट ऑन करो और लाइव टीवी स्क्रीन पर होता है। शमसीद उन घरेलू महिलाओं में से हैं जो सुबह से उठकर गृहस्थी में व्यस्त रहती हैं। पति मो. मुहिब अख्तर मिस्त्री का काम करते हैं। तीन बच्चे हैं अफरीदी,रोमी बानो और समीर।

शमसीद की दुनिया यही है। दिन की शुरुआत ही किचन से होती है। पीने का पानी भरना। नाश्ता तैयार करना। पति के लिए टिफिन बनाना। बच्चों को तैयार करना। उनकी आम जिंदगी ऐसी ही है। अपने लिए सोचने की फुरसत ही नहीं मिलती थी। लेकिन अब वे अपने लिए भी वक्त निकाल रही हैं। हाथ में स्मार्ट फोन आते ही सबकुछ बदल चुका है। संचार क्रांति के तहत स्मार्ट फोन मिलने के बाद कामकाज के बीच मनोरंजन ने भी स्थान बना लिया है। वे सुबह उठकर अपना काम तो करती ही हैं। मोबाइल पर मनोरंजन का मसाला भी तैयार कर रखा है। फोन पर पसंदीदा गाने डाउनलोड करवा रखे हैं। फोन पर गाने चलते हैं और शमसीद गुनगुनाते हुए घर के काम निपटाती है। वह केवल गाने ही नहीं सुनती बल्कि देश-प्रदेश के समाचारों पर भी नजर रखती है। अफरीदी जब मजदूरी कर घर लौटते हैं तो उनके साथ इसकी चर्चा भी करती है। सरकार ने मोबाइल देकर इन परिवारों को विभिन्न योजनाओं के करीब ला दिया है। शमसीद की तरह उनकी ही दो सहेलियों के पास जब स्मार्ट फोन आया तो उन लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी इंटरनेट से निकाली और उसी के अनुसार आवेदन किया।

अब उनका आवेदन प्रक्रियाधीन है। यानी जल्द ही उन्हें मकान बनाने के लिए निर्धारित राशि मिलने लगेगी। कुल मिलाकर मोबाइल आने के बाद अब लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में भी पूरी जानकारियां मिल रही हैं। सरकारी स्मार्टफोन ने आम आदमी को कितना स्मार्ट बनाया है इसका अंदाजा शमसीद की लाइफ स्टाइल से लगाया जा सकता है। एक दिन शाम को घर लौटते समय मुहिब अपनी पसंदीदा सब्जी की फरमाइश की। शमसीद फौरन किचन में गईं। राशन में गरम मसाला नहीं था। उन्होंने इसकी जानकारी मुहिब को दी। कहा कि किराने की दुकान से गरम मसाले का पैकेट लेते आना। जरूरत छोटी ही सही लेकिन समय पर पूरी हो जाए तो सुकून मिलता है। यही हुआ भी। मुहिब का कहना है कि बच्चे कहते थे मोबाइल ले लो।पत्नी भी इस बात को लेकर रोज टोकती थी, लेकिन मजदूरी के पैसे तो केवल दाल-रोटी ही चल सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने संचार क्रांति योजना के जरिए हम लोगों की जरूरत का ख्याल रखा।

हर हाथ में स्मार्टफोन देकर जैसे हर समस्या का समाधान दे दिया हो। फाेन ने लोगों को काफी जागरूक बनाया है। मजदूरी करने वाले भी इसका उपयोग कर पा रहे हैं। यह फोन बच्चों की पढ़ाई में भी मददगार साबित हो रहा है। शोध से पता चलता है कि मोबाइल प्रौद्योगिकी महिलाओं को बेहतर अवसर प्रदान करके लिंग असमानताओं को कम करने में मदद कर सकती है। स्मार्टफोन एमओयूसी के माध्यम से ऑनलाइन पाठ्यक्रमों तक पहुंच प्रदान करके साक्षरता, शिक्षा और कौशल अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं। उपयोगकर्ता  स्व-केंद्रित मॉड्यूल शैक्षणिक सामग्री का लाभ कभी भी कही भी ले सकते हैं। स्मार्टफोन के माध्यम से महिलाओं को आजीविका और नौकरी के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते है। ऐसे कई प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप हैं जो ऐसे अवसरों से सम्बंधित जानकारी प्रदान करते हैं।

छत्तीसगढ़ में एनआरएलएम का बिहान ऐप, छोटे महिला उद्यमियों के लिए हस्तशिल्प उत्पाद और कलाकृति की तस्वीरें अपलोड करने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जिसके बाद एनआरएलएम इन उत्पादों को बाजार में बेचने में मदद करता है। छत्तीसगढ़ रोज़गार समाचार जैसे ऐप्स हैं जो राज्य में खुली सरकारी नौकरियों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। अन्य निजी स्वामित्व वाले नौकरी प्लेटफ़ॉर्म हैं जहां उपयोगकर्ता के कौशल से मेल खाने वाली नौकरी तलाश की जा सकती है। उदहारण के तौर पर एक बढ़ई बढ़ईगीरी के लिए विशिष्ट नौकरियों की तलाश कर सकता है।



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