September 17, 2018

आईआईटी कॉलेज में जाकर कार डिजाइन करना चाहता है पारस, सरकार कर रही है सपना साकार करने में मदद

गरीबी ने लाख रोड़े अटकाए, लेकिन किसी मोड़ पर दोस्त ने राह सुझाई और पारस साहू अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ा। जी हां, अब वह कवर्धा के आवासीय कोचिंग में जेईई की तैयारी कर रहा है ताकि आईआईटी में दाखिला लेकर कार डिजाइन का अपना शौक पूरा कर सके। वह कहता है कि गरीबी बहुत देख ली।

बड़ा आदमी बनना है और बड़ा आदमी बनने के लिए खूब पढ़ाई करनी है। उसे विश्वास हो गया है कि यहां पढ़ाई करने के बाद सफलता निश्चित है। दसवीं पास करने के बाद पारस ने मैथ्स लिया। तब वह नहीं जानता था कि मैथ्स लेने के फायदे क्या होंगे। पसंदीदा सब्जेक्ट था इसलिए मैथ्स चुना। धीरे-धीरे पता चला कि मैथ्स की पढ़ाई अच्छे से करो तो आईआईटी की राह आसान होगी। सोचा कि प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेते ही ड्रीम प्रोजेक्ट की तरफ आगे बढ़ूंगा। बार-बार मन में एक ही सवाल आता था कि इतने पैसे आएंगे कहां से? कैसे मैं सफल हाऊंगा? लेकिन ये सवाल उसके सपनों में बाधा नहीं बने। वह रोज अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के बारे में सोचता। रोज यही सोचते-सोचते आंख लग जाती। सुबह फिर वही दिनचर्या। सपने देखते-देखते 12वीं पास कर ली। घर के हालात उसे नौकरी की तरफ बढ़ने को मजबूर कर रहे थे, लेकिन वह पढ़ना चाह रहा था। चार महीने इसी उधेड़बुन में निकल गए।

वह भटकता रहा। तभी उसके दोस्त कोमल ने आवासी कोचिंग की जानकारी दी। पारस की जुबान में, मेरे दोस्त कोमल ने बताया कि कलेक्टर सर ने यहां काेचिंग क्लास की तैयारी कर रखी है। तू जा सकता है। मुझे भी लगा कि मेरा नंबर अच्छा है तो सिलेक्शन हो ही जाएगा। मैंने फार्म भरे। एग्जाम दिया। सिलेक्शन हो गया। अब यहां रहकर पढ़ाई कर रहा हूं। पूरा विश्वास है कि मैं जेईई में अच्छे रैंक लाऊंगा और अच्छे कॉलेज में दाखिला भी हो जाएगा। पारस का कहना है कि काेचिंग में आकर पता चला कि सवाल के तरीके कैसे हैं और उन्हें साल्व कैसे किया जाता है। इसकी जानकारी नहीं थी। 11वीं-12वीं में ये सब किसी ने बताया ही नहीं। सवाल कैसे आएंगे या उनके आंसर कैसे देने हैं, कुछ भी नहीं। कोचिंग में आने के बाद कांसेप्ट को समझना सीखा और सबकुछ आसान लगने लगा। मतलब थोड़ा सा दिमाग लगाओ और आंसर सामने होगा। इससे हमारे सोचने का ढंग बदला। आत्मविश्वास जागा। मैं तो सरकार को और कलेक्टर सर को थैंक्स कहना चाहूंगा, जिन्होंने हमारे लिए इतना सोचा। कोचिंग के व्याख्याता हिमांशु का कहना है कि बच्चों को 100 प्रतिशत भरोसा है तो इससे कम वे कैसे कह सकते हैं।

शुरुआत में उन्होंने बच्चों की बेसिक सुधारी है। उनकी अंग्रेजी भाषा पर भी काम किया जा रहा है ताकि आगे जाकर उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। मेन सब्जेक्ट की पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। मॉर्निंग में शुरू होने वाली क्लास दोपहर 12 बजे तक चलती है। फिर शाम की शिफ्ट में मेन विषयों की पढ़ाई कराई जाती है।

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