September 17, 2018

आईआईटी धनबाद से इंजीनियरिंग करने वाले दानेश हाशमी ने टीचिंग चुना ताकि अपने जैसे ही कई और बना सकें

फिल्म थ्री इडियट्स के क्लाइमेक्स में आमीर खान का कैरेक्टर फुंग्सुक वांगड़ु। जो हैं तो साइंटिस्ट लेकिन बच्चों के लिए स्कूल चला रहे। आर्थिक तंगी से जूझ रहे होनहारों का भविष्य गढ़ने छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में शुरू की गई आकांक्षा योजना से जुड़े ऐसे ही शख्स हैं दानेश हाशमी। वे हैं तो मशीन डिजाइन के मास्टर लेकिन फिलहाल बच्चों को गणित पढ़ा रहे हैं। उनका भविष्य गढ़ रहे हैं।

दानेश ने आईआईटी धनबाद से एमटेक किया, लेकिन मल्टी नेशनल कंपनी में नहीं गए। टीचिंग को ही पैशन बना लिया। पढ़ाई डिग्री या जॉब के लिए नहीं नॉलेज के लिए की जानी चाहिए। थ्री इडियट्स में आमिर भी यही समझाइश देते हैं। दानेश भी बिल्कुल ऐसा ही सोचते हैं और इसी पर काम कर रहे हैं। वे कहते हैं- मैं किताबी भाषा में नहीं पढ़ाता। बच्चों से कहता हूं अपने आसपास देखो। समाज के हालात देखो। नॉलेज गेन करो। इसी से सफलता मिलेगी।

पटना बिहार के रहने वाले दानेश ने स्कूल की पढ़ाई वहीं से की है। गणित विषय से 12वीं करने के बाद 2010 में एआई ट्रिपल ई का एग्जाम दिया।अच्छी रैंक आई तो दूसरे राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के विकल्प खुले, लेकिन घर वालों ने पटना से बाहर जाने नहीं दिया। फिर क्या था पटना के ही मौलाना आजाद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी (एमएसीईटी) में एडमिशन लिया। मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। टॉप फाइव स्टूडेंट्स में से रहे। बीटेक के दौरान फाइनल ईयर में ही मास्टर डिग्री के लिए आईआईटी का लक्ष्य रखा। इसके लिए गेट का एग्जाम दिया। क्वालिफाई हुए। इसी के जरिए आईआईटी धनबाद में प्रवेश मिला। और यहीं से मशीन डिजाइन के मास्टर बने।

दरअसल इजीनियरिंग के दौरान ही पढ़ने-पढ़ाने का क्रेज बना। जूनियर उनसे सवाल पूछने आते और वे पढ़ाने बैठ जाते। सवालों को अलग-अलग तरीके से समझाना और जूनियर्स को संतुष्ट करना अच्छा लगने लगा। फिर जूनियर्स को ट्यूशन भी देने लगे। एमटेक से पहले एक साल के गैप में भी मैंने जूनियर्स को पढ़ाया। दानेश का कहना है कि समाज में अपनी ससख्त भूमिका निभाने का बेहतर माध्यम है शिक्षा। किसी कंपनी में जाने से ज्यादा बेहतर लगा इस आकांक्षा योजना से जुड़ना। इसलिए यहां हूं। मैंने महसूस किया है कि 10वीं तक तो सबकुछ ठीक चलता है, लेकिन इसके बाद सही गाइडेंस के लिए अच्छे टीचर की आवश्यकता होती है। मुझे लगता है कि टीचिंग में रहकर मैं अपने जैसा और अपने से बेहतर बना सकता हूं।

आकांक्षा योजना इसलिए शुरू की गई ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे होनहार सिर्फ इसलिए पीछे न रह जाएं कि उन्हें अच्छी कोचिंग नहीं मिली। दानेश खुद ऐसे बच्चों को आईआईटी, जेईई के लिए तैयार कर रहे हैं। वे उन्हें गणित पढ़ाते हैं। फिलहाल कोचिंग में 150 से ज्यादा बच्चे हो गए हैं। और भी आने वाले हैं। दानेश बताते हैं कि उनका बैकग्राउंड एजुकेशनल नहीं रहा। पिता बिजनेस मैन हैं। आठ भाई-बहने हैं। भाईयों में वे सबसे छोटे हैं और वे अकेले हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की। बीटेक की पढ़ाई होम टाउन में रहकर करना संघर्षपूर्ण रहा। लेकिन मैं पढ़ना चाहता था। इसलिए पढ़ा। रुका नहीं। बाकि भाई बिजनेस कर रहे हैं।

दानेश अपनी क्वालिटी को बच्चों में फैलाना चाहते हैं। उनके दिमाग को विकसित करना चाहते हैं। वे कहते हैं- उन्हें देखकर ज्यादा अच्छा लगेगा कि उनका पढ़ाया हुआ कोई बच्चा अच्छे मुकाम पर पहुंचे। मैं बच्चों के साथ अपनी स्टूडेंट लाइफ शेयर करता हूं। एक-दो बच्चे तो बहुत अच्छा कर रहे हैं और बाकि भी प्रेरित हो रहे हैं।



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